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Father's Day Special वही मेरा मान वही मेरा सम्मान है वही है धरती वही है अंबर वही मेरा सारा जहान है

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कहानी कुछ इस प्रकार है – रविवार का दिन था और मैं बड़े  गुस्से में घर छोड़ कर निकल बाहर चला आया। मन में सोचा अब तभी लौटूंगा जब बहुत बड़ा आदमी बन जाऊंगा। इतना गुस्से में था कि गलती से पापा के ही जूते (Shoes) पहन कर के निकल गया। मन ही मन में बड़बड़ा रहा था कि जब मोटर साइकिल नहीं दिलवा सकते, तो क्यूँ इंजीनियर बनाने के सपने देखतें हैं। आज तो मैं हिम्मत करके, पापा का पर्स भी उठा लाया था। पर्स जिसे वो किसी को हाथ तक न लगाने देते, यहाँ तक कि मम्मी को भी नहीं। इस पर्स में जरुर, पैसों के हिसाब की डायरी होगी। पता तो चले कितना माल छुपाया है पिताजी ने हम सबसे। कच्चे रास्ते से आगे चलकर जैसे ही मैं पक्की सड़क पर आया, मुझे लगा जूतों में कुछ चुभ रहा है। मैंने जूता निकाल कर देखा कि मेरी एडी से थोडा सा खून रिस रहा था। कोई कील मेरे पैर में घुस गयी थी। दर्द से गुस्सा और बढ़ गया। आगे कुछ दूर ही बढ़ा था कि मुझे पैरों में गीलेपन का एहसास हुआ, सड़क पर पानी बिखरा पड़ा था। पाँव उठाकर देखा तो जूतों के निचले हिस्सों (Sole) में छेद थे। मैं जैसे – तैसे लंगडाकर बस स्टॉप पहुंचा, पता चला एक घंटे तक क...

पढ़ने को मजबूर कर देगी ये कहानी

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*🌟शिक्षा से बढ़कर कोई धन नहीं🌟* एक थे राजा। उन्हें पशु-पक्षियों से बहुत प्यार था। वे पशु-पक्षियों से मिलने के लिए वन में जाते थे। हमेशा की तरह एक दिन राजा पशु-पक्षियों को देखने के लिए वन में गए। अचानक आसमान में बादल छा गए और तेज-तेज बारिश होने लगी।  बारिश होने के कारण उन्हें ठीक से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। राजा रास्ता भटक गए। रास्ता दूंढते-ढूंढते किसी तरह राजा जंगल के किनारे पहुंच ही गए। भूख-प्यास और थकान से बेचैन राजा एक बड़े से पेड़ के नीचे बैठ गए। तभी राजा को उधर से आते हुए तीन बालक दिखाई दिए। राजा ने उन्हें प्यार से अपने पास बुलाया। बच्चों यहां आओ। मेरी बात सुनो। तीनों बालक हंसते-खेलते राजा के पास आ गए। तब राजा बोले- मुझे बहुत भूख और प्यास लगी है।  क्या मुझे भोजन और पानी मिल सकता है। बालक बोले, पास में ही हमारा घर है। हम अभी जाकर आपके लिए भोजन और पानी लेकर आते हैं। आप बस थोड़ा-सा इंजतार कीजिए। तीनों बालक दौड़कर गए और राजा के लिए भोजन और पानी ले आए। राजा बालकों के व्यवहार से बहुत खुश हुए। वे बोले, प्यार बच्चों, तुमने मेरी भूख और प्यास मिटाई है। ...

जानवर कौन - हिन्दी कहानी

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दोस्तों plz इसे पूरा पढ़े  *जानवर कौन ????* मधु एक बकरी थी,  जो  कि माँ बनने वाली थी।  माँ बनने से पहले ही मधू ने भगवान् से दुआएं मांगने शुरू कर दी।  कि "हे भगवान् मुझे बेटी देना बेटा नही"।  पर किस्मत को  ये मन्जूर ना था, मधू ने एक बकरे को  जन्म दिया, उसे देखते ही मधू रोने लगी।  साथ की बकरियां मधू के रोने की वजह जानती थी, पर क्या कहती।  माँ चुप हो  गई और अपने बच्चे को  चाटने लगी।  दिन बीतते चले गए और माँ के दिल मे अपने बच्चे के लिए प्यार उमड़ता चला गया।  धीरे- धीरे माँ अपने बेटे में सारी दुनियाँ को  भूल गई, और भूल गई भविष्य की उस सच्चाई को  जो  एक दिन सच होनी थी।  मधू रोज अपने बच्चे को चाट कर दिन की शुरूआत करती,  और उसकी रात बच्चे से चिपक कर सो  कर ही होती।  एक दिन बकरी के मालिक के घर बेटे  ने जन्म लिया।  घर में आते मेहमानानो और  पड़ोसियों की भीड़ देख मधू बकरी ने साथी बकरी से पूछा "बहन क्या हुआ आज बहुत भीड़ है ...