Father's Day Special वही मेरा मान वही मेरा सम्मान है वही है धरती वही है अंबर वही मेरा सारा जहान है
कहानी कुछ इस प्रकार है – रविवार का दिन था और मैं बड़े गुस्से में घर छोड़ कर निकल बाहर चला आया। मन में सोचा अब तभी लौटूंगा जब बहुत बड़ा आदमी बन जाऊंगा। इतना गुस्से में था कि गलती से पापा के ही जूते (Shoes) पहन कर के निकल गया। मन ही मन में बड़बड़ा रहा था कि जब मोटर साइकिल नहीं दिलवा सकते, तो क्यूँ इंजीनियर बनाने के सपने देखतें हैं। आज तो मैं हिम्मत करके, पापा का पर्स भी उठा लाया था। पर्स जिसे वो किसी को हाथ तक न लगाने देते, यहाँ तक कि मम्मी को भी नहीं। इस पर्स में जरुर, पैसों के हिसाब की डायरी होगी। पता तो चले कितना माल छुपाया है पिताजी ने हम सबसे। कच्चे रास्ते से आगे चलकर जैसे ही मैं पक्की सड़क पर आया, मुझे लगा जूतों में कुछ चुभ रहा है। मैंने जूता निकाल कर देखा कि मेरी एडी से थोडा सा खून रिस रहा था। कोई कील मेरे पैर में घुस गयी थी। दर्द से गुस्सा और बढ़ गया। आगे कुछ दूर ही बढ़ा था कि मुझे पैरों में गीलेपन का एहसास हुआ, सड़क पर पानी बिखरा पड़ा था। पाँव उठाकर देखा तो जूतों के निचले हिस्सों (Sole) में छेद थे। मैं जैसे – तैसे लंगडाकर बस स्टॉप पहुंचा, पता चला एक घंटे तक क...