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"दर्द छुपाना जरूरी है..." सुमन अग्रवाल "सागरिका" जी आगरा की कलमकार की ग़ज़ल | Gyani Guide साहित्यक मंच

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"दर्द छुपाना जरूरी है..." सुमन अग्रवाल "सागरिका" जी आगरा की कलमकार की ग़ज़ल | Gyani Guide साहित्यक मंच  रूठे हुए दिल को मनाना भी जरूरी है। दिल से दोस्ती निभाना भी जरूरी है। यूँ तो जिंदगी में गम, निराशा, आसूँ बहुत, नमी आँखों की, दर्द छुपाना भी जरूरी है। वैसे तक़लीफ़, दुख-दर्द तो है बहुत पर, खुश रहने को हँसना-हँसाना भी जरूरी है। बेसबब दिल पर कोई बोझ न हो बस, जिंदगी में जंग को मिटाना भी जरूरी है। तनावग्रस्त जिंदगी करें भी तो क्या करें, अपनों को परेशानी बताना भी जरूरी है। कभी भी कोई अपशब्द बुल जाये तो, गलती पर सिर झुकाना भी जरूरी है। मन को शांति रखने के लिए "सुमन" हमें मंदिर मज़ारे जाना भी जरूरी है। सुमन अग्रवाल "सागरिका"       आगरा लेखिका परिचय :- नाम :- सुमन अग्रवाल "सागरिका"  पिता का नाम :- रामजीलाल सिंघल माता का नाम :- उर्मिला देवी सिंघल जन्म :- 26 जनवरी निवास स्थान :- आगरा प्रकाशित रचनाएँ :- अनेक पत्र- पत्रिकाओं में निरन्तर सम्मान :- गीतकार साहित्यिक मंच द्वारा श्रेष्ठ ग़ज़लकार उपाधि से सम्मानित, प्रभा मेरी कलम द्व...

विज्ञान चला है... हरियाणा के कलमकार की अद्भुत रचना | Gyani Guide साहित्यक मंच

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विज्ञान चला है... हरियाणा के कलमकार की अद्भुत रचना | Gyani Guide साहित्यक मंच  विज्ञान चला है दूर था बात हुई मजबूर था मिलने से  मिलन की घड़ी साथ हुई  बीमार था कई दिनों से तबियत ख़ास हुई  किसी ने पूछा मुझसे  क्या जादू चला है ? मैंने कहा नहीं – 2  विज्ञान चला है...... दूरी घट जाती है  मजबूरी हट जाती है  उम्मीदें बढ़ा देता है  जीने का मकसद सिखा देता है  दुनिया से अलग नजरिया दिखाया  मुझे अलग संसार बताया  जीना आसान हो गया  चाँद धरती समान हो गया  हर प्राकृतिक घटना का पहले पता चल जाता है  दूर देश से कोई छाछ पीने भारत आ जाता है         फिर कोई कहता है कि जादू चला है ?  मैंने कहा नहीं – 2  विज्ञान चला है.......... गर्मी में ठंडक दे दी  सर्दी में ठंडक ले ली  अंतरिक्ष को किसी ने घर बना लिया  दिमाग से मेरे अंधविश्वास हटा दिया  क्या सोचता है कोई पता चल जाता है  अब जल्दी से लैटर घर ...

देश के शहीदों को समर्पित हिमाचल के लेखक की अद्भुत रचना "शहीदों की कुर्बानी" | Gyani Guide साहित्यिक मंच

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देश के शहीदों को समर्पित हिमाचल के लेखक की अद्भुत रचना "शहीदों की कुर्बानी" | Gyani Guide साहित्यिक मंच शहिदों की कुर्बानी           उनके क्या मालूम घात लगा बैठा फियादिन।                                            चल पड़े हैं फर्ज की राह में हर दिन  याद आ गए भगत सिंह  ,सुखदेव, राजगुरु।                                             फियादिन कहर ढाए फिरगिंयो ने किया शुरू।।.                             पुलवामा की धरती को आंतकी कर गये लहुलुहान।                                            हैवानियत का मंजर दिखा छुप गये शैतान।।  ...

"लड़की की अभिलाषा" झारखंड के लेखक चंद्रमोहन जी द्वारा रचित | Gyani Guide साहित्यिक मंच

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"लड़की की अभिलाषा" झारखंड के लेखक चंद्रमोहन जी द्वारा रचित | Gyani Guide साहित्यिक मंच हाँ,मैं लड़की हूँ  पंक्षी हूँ ,माँ - बाबा की  आँगन की  सीखा हूँ उड़ना  अभी- अभी ही  आपने हिस्से की आसमान  नाप लूँगी मुझे उड़ने दो . बोल सकुंगी  उड़ूँगी, अपने मन से  तूफान की बात को न मानते हुए  जिधर चाहूँ  उड़ चलूँ   मुझे उड़ने दो . कलि फूल हूँ  समाज बागवान की  ओढूँगी ,बिछाऊँगी समाज की अच्छी सोच से  सुगंध बिखरुंगी  चारो ओर  मुझे खिलने दो . नदी हूँ मैं ठण्ड पानी की  तुम्हारे जीत और हार की  तुम्हारे मन और जीवन में  प्यार और मिठास भरने  मुझे बहने दो . नदी के दो किनारों के मध्य  छोटे- बड़े पत्थरों के ऊपर  जिधर से जाऊंगी पथ बनाते जाऊंगी सभी तरह की गुस्सों को  हर्ष में बदलते जाऊंगी मुझे बहने दो . हाँ, मैं लड़की हूँ  उड़ने दो ,खिलने दो  बहने दो ,जीवन जीने दो . @ चंद्र मोहन किस्कू  गाँ...