Posts

राहुल के विदेश से लौटने पर साफ होगा अध्यक्ष चुनाव पर संशय https://ift.tt/eA8V8J

कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति लंबे समय से राज्यों के एक हजार के करीब मतदाताओं की सूची को अंतिम रूप देने में जुटी है जो नए अध्यक्ष को चुनेंगे। from Latest And Breaking Hindi News Headlines, News In Hindi | अमर उजाला हिंदी न्यूज़ | - Amar Ujala https://ift.tt/3ht2NiF

आईटी कंपनी की नौकरी छोड़ स्क्रैप टायर से फुटवियर बनाना शुरू किया, सालाना 7 लाख रुपए का बिजनेस https://ift.tt/2KBEWkX

Image
पुणे की रहने वाली 28 साल की आईटी प्रोफेशनल पूजा आप्टे बादामीकर अपनी अच्छी-खासी नौकरी छाेड़कर स्क्रैप टायर से फुटवियर बना रही हैं। उनका यह इनोवेशन पर्यावरण बचाने में अहम भूमिका निभा रहा है। वे हर महीने 200 पीस फुटवियर बना कर सालाना 7 लाख रुपए का बिजनेस कर रही हैं। पुणे यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक एंड टेलीकॉम इंजीनियरिंग करने के बाद पूजा को एक आईटी कंपनी में नौकरी मिल गई थी। पूजा ने वहां चार साल तक काम किया। इसी दौरान उन्होंने दिल्ली की टेरी यूनिवर्सिटी से रिन्युएबल एनर्जी में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। कोर्स के दौरान उन्होंने अप साइकलिंग और रीसाइकलिंग के बारे में पढ़ना शुरू किया। तब उन्हें पता चला कि प्लास्टिक के बारे में तो सब जानते हैं लेकिन टायर का इश्यू सीरियस होने के बाद भी बहुत कम लोग इसके बारे में जानते हैं। 2018 में अपकमिंग वुमन एंटरप्रन्योर कैटेगरी में प्राइज जीता पूजा कहती हैं- दुनिया में हर साल सौ करोड़ स्क्रैप टायर जेनरेट होते हैं। इसमें से सिर्फ 0.1 प्रतिशत ही रीयूज और रीसाइकिल करते हैं। ऐसे में बहुत से टायर लैंड फिल में ऐसे ही पड़े रहते हैं। इस पर पढ़ना और रिसर्च करना शुरू किया...

35 दिन में 7वीं बार साथ बैठेंगे किसान और सरकार; लेकिन क्यों नहीं बन रही बात? कहां फंस रहा है पेंच? जानें सबकुछ https://ift.tt/3nYt7U5

Image
खेती से जुड़े तीन कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन का आज 35वां दिन है। सरकार और किसानों के बीच 21 दिन बाद आज 7वें दौर की बातचीत होगी। इससे पहले 6 दौर की बातचीत में कोई हल नहीं निकल सका है। किसान तीनों कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हैं। उधर, सरकार लिखित में किसानों को जवाब देने को तैयार हैं, लेकिन आखिर क्या वजह है कि इतने दिन और इतनी बातचीत का भी कोई हल नहीं निकल सका है? पहले की बातचीत में क्या हुआ? किसान किन मांगों पर अड़े हैं? सबसे पहले किसान और सरकार के बीच अब तक हुई बातचीत में क्या निकला? पहला दौरः 14 अक्टूबर क्या हुआः मीटिंग में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की जगह कृषि सचिव आए। किसान संगठनों ने मीटिंग का बायकॉट कर दिया। वो कृषि मंत्री से ही बात करना चाहते थे। दूसरा दौरः 13 नवंबर क्या हुआः कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल ने किसान संगठनों के साथ मीटिंग की। 7 घंटे तक बातचीत चली, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला। तीसरा दौरः 1 दिसंबर क्या हुआः तीन घंटे बात हुई। सरकार ने एक्सपर्ट कमेटी बनाने का सुझाव दिया, लेकिन किसान संगठन तीनों कानून रद्द करने की म...

किसान कहते हैं- 'अभी तो हमने सिर्फ तंबू गाड़े हैं, कानून वापस नहीं हुए तो हाइवे पर पक्के मकान भी बना लेंगे' https://ift.tt/38Pgg0p

Image
किसान आंदोलन का गढ़ बन चुका टीकरी बॉर्डर दिल्ली के सबसे पश्चिमी छोर पर है। ग्रीन लाइन पर दौड़ने वाली दिल्ली मेट्रो इसी टीकरी बॉर्डर को पार करके हरियाणा के बहादुरगढ़ में दाखिल होती है। यह मेट्रो तो आज भी अपनी रफ्तार से दिल्ली और हरियाणा के बीच दौड़ रही है, लेकिन इस मेट्रो लाइन के ठीक नीचे चलने वाली मुख्य रोहतक रोड बीते एक महीने से आंदोलन कर रहे किसानों का अस्थायी डेरा बन गई है। इस सड़क पर चलने वाला ट्रैफिक 26 नवंबर से बंद है। दिल्ली से हरियाणा जाने के लिए कुछ वैकल्पिक रास्ते खुले हुए हैं। इनकी जानकारी दिल्ली ट्रैफिक पुलिस समय-समय पर जारी करती है। दिल्ली-रोहतक रोड पूरी तरह से किसानों के कब्जे में है और हर दिन के साथ उनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इस सड़क पर जगह-जगह खड़े मेट्रो के पिलर अब आंदोलन कर रहे किसानों का अस्थायी पता बन चुके हैं। मसलन, महिलाओं द्वारा चलाया जा रहा लंगर कहां लगा है, यह सवाल पूछने पर कोई बता देगा कि वह पिलर नंबर-788 के पास है। ऐसे ही यहां से निकल रहे अखबार ‘ट्रॉली टाइम्स’ के बारे में पूछने पर कोई भी आंदोलनकारी बता देता है कि ट्रॉली टाइम्स का ऑफिस पिलर नंबर-78...

सुनो 2020... जा रहे हो! अपना साल भर का हिसाब-किताब भी साथ ही लेते जाओ https://ift.tt/37Zhff7

Image
1 जनवरी 2020 को प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया था, ‘यह एक अद्भुत साल है। यह साल खुशी और संपन्नता से भर देगा। इस साल में सब स्वस्थ रहें और सबकी आकांक्षाएं पूरी हों।’ 2020 ने तो मोदी की नहीं सुनी। खुशी और संपन्नता तो दूर, आटा-दाल से लेकर शराब तक के लिए लंबी-लंबी कतारें लगीं। सेहत का आलम ये रहा कि कोरोना को भगाने के लिए मुकेश अंबानी तक एंटीलिया की छत पर थाली-कटोरा पीटते दिखे। आकांक्षाएं तो सबकी धरी की धरी रह गईं। चलते हैं छोटे से सफर पर... यहां हमने बीते साल के 12 महीनों की तस्वीरें उकेरी हैं। देखिए और बताइए कि क्या आपकी जिंदगी भी यहीं से गुजरी या आपने कुछ और किया... आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें How Indians changed their habits in 2020 from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3aOCGRX

बेंगलुरू में न्यू ईयर पार्टी बैन, मुम्बई, शिमला और मनाली में नाइट कर्फ्यू ने जश्न की तैयारियों पर फेरा पानी https://ift.tt/3rxfQEe

Image
देश में इस बार नया साल मनाना आसान नहीं होगा। न्यू ईयर ग्रैंड सेलिब्रेशन के लिए प्रसिद्ध मुंबई, बेंगलुरू, मैसूर और पुड्डुचेरी में नए साल की वो तस्वीर नहीं दिखेगी, जो यहां के जश्न के लिए मशहूर है। सबसे कम पाबंदियां गोवा में हैं, लेकिन यहां की महंगाई के बीच नया साल मनाना आसान नहीं होगा। जानिए, देशभर के वो शहर, जो नए साल के जश्न के लिए मशहूर हैं, वहां के हालात कैसे हैं और नए साल का सेलिब्रेशन कैसे होगा, पूरी रिपोर्ट... मैसूर : आतिशबाजी से रोशन होने वाला मैसूर पैलेस इस साल सूना रहेगा मैसूर पैलेस को देखने हर साल करीब 60 लाख पर्यटक पहुंचते हैं। विंटर फेस्टिवल से जगमगाने वाला यह पैलेस इस साल शांत है। नाइट कर्फ्यू के कारण यहां न्यू ईयर सेलिब्रेशन नहीं होगा। कर्नाटक के मैसूर पैलेस में हर साल 24 दिसंबर से ही विंटर फेस्टिवल का आगाज होता है। आतिशबाजी देखने के लिए बड़ी संख्या में सैलानी यहां आते हैं, लेकिन इस साल प्रशासन ने विंटर फेस्टिवल पर पूरी तरह रोक लगा दी है। मैसूर होटल ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सी. नारायण गोड़ा के मुताबिक, मैसूर का कोई भी बड़ा होटल इस साल न्यू ईयर पार्टी की तैयारी नहीं क...

उस तानाशाह को अमेरिका ने फांसी दी, जिसने अपने ऊपर हुए हमले के बाद 148 लोगों को मरवा दिया था https://ift.tt/2KKt9kd

Image
आज ही के दिन 2006 में दो दशक तक इराक पर राज करने वाले तानाशाह सद्दाम हुसैन को फांसी दी गई थी। इराक के तिकरित के एक गांव में पैदा हुए सद्दाम हुसैन ने महज 20 साल की उम्र में बाथ पार्टी की सदस्यता ली। 1962 में इराक में हुए विद्रोह का भी हिस्सा सद्दाम हुसैन रहे। उस वक्त उनकी उम्र 25 साल थी। 31 साल का होते-होते सद्दाम इराक की सत्ता में आ गए। बात 1968 की है। जब सद्दाम ने अहमद हसन अल बक्र के साथ मिलकर सत्ता पर कब्जा कर लिया था। अल बक्र के साथ 11 साल शासन करने के बाद सद्दाम ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर अल बक्र को भी इस्तीफे के लिए मजबूर कर दिया और खुद इराक के राष्ट्रपति बन गए। इसके बाद अगले 20 साल सद्दाम ने इराक पर राज किया। इस दौरान 1982 में सद्दाम पर जानलेवा हमले की कोशिश हुई। इस हमले के बाद दुजैल में 148 शियाओं को मार दिया गया। 2006 में जब सद्दाम को फांसी पर चढ़ाया गया, तो उन्हें इसी नरसंहार का दोषी ठहराया गया था। इससे पहले 2003 में अमेरिका और ब्रिटेन ने इराक पर हमला कर सद्दाम को गिरफ्तार कर लिया था। और इसी के साथ इराक में सद्दाम शासन का खात्मा हुआ। ISRO की स्थापना करने वाले वैज्ञानि...