"लड़की की अभिलाषा" झारखंड के लेखक चंद्रमोहन जी द्वारा रचित | Gyani Guide साहित्यिक मंच
"लड़की की अभिलाषा" झारखंड के लेखक चंद्रमोहन जी द्वारा रचित | Gyani Guide साहित्यिक मंच
हाँ,मैं लड़की हूँ
पंक्षी हूँ ,माँ - बाबा की
आँगन की
सीखा हूँ उड़ना
अभी- अभी ही
आपने हिस्से की आसमान
नाप लूँगी
मुझे उड़ने दो .
बोल सकुंगी
उड़ूँगी, अपने मन से
तूफान की बात को न मानते हुए
जिधर चाहूँ
उड़ चलूँ
मुझे उड़ने दो .
कलि फूल हूँ
समाज बागवान की
ओढूँगी ,बिछाऊँगी
समाज की अच्छी सोच से
सुगंध बिखरुंगी
चारो ओर
मुझे खिलने दो .
नदी हूँ मैं
ठण्ड पानी की
तुम्हारे जीत और हार की
तुम्हारे मन और जीवन में
प्यार और मिठास भरने
मुझे बहने दो .
नदी के दो किनारों के मध्य
छोटे- बड़े पत्थरों के ऊपर
जिधर से जाऊंगी
पथ बनाते जाऊंगी
सभी तरह की गुस्सों को
हर्ष में बदलते जाऊंगी
मुझे बहने दो .
हाँ, मैं लड़की हूँ
उड़ने दो ,खिलने दो
बहने दो ,जीवन जीने दो .
@ चंद्र मोहन किस्कू
गाँव- बेहड़ा, डाकघर - हल्दाजुड़ी
वाया- घाटशिला ,जिला - पूर्वी सिंहभूम
झारखण्ड-832303,मोबाइल नो-9732939088
सूचना :- Gyani Guide द्वारा संचालित साहित्यिक मंच आपके लिए एक E-Magazine यानी Online पत्रिका बनाने पर विचार कर रहा है जिसमे लगभग 50 रचनाये उनके लेखको के परिचय के साथ प्रकाशित की जाएंगी आप सभी से निवेदन है कि अपनी अच्छी अच्छी रचनाये हमे भेजे gyaniguide@gmail.Com पर
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